श्रीमती सुषमा स्वराज – एक प्रेरणादायी जीवन चरित्र

लेखक: हिमांशु रंजन

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श्रीमती सुषमा स्वराज का हाल ही में निधन हुआ | जिन्होंने ने भी उनके मुखर एवं प्रखर वाणी को सुना हो, उन्हें थोड़ा आघात पहुंचा | उनकी मृत्यु को समय से पहले कहा जा सकता हैं |

नारी सशक्तिकरण के उदाहरणस्वरूप उनका जीवन चरित्र उपलब्धियों से भरा रहा हैं | सात बार लोक सभा एवं राज्य सभा के लिए जनमत पाना, तीन बार हरियाणा विधान सभा के लिए चुना जाना, विदेश मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और दिल्ली में अल्पकाल के लिए मुख्यमंत्री होना | इन सभी जिम्मेदारियों को उन्होंने सेवा भाव से निभाया |

बेल्लारी में श्रीमती सोनिया गाँधी को चुनौती देना, एवं कन्नड़ भाषा में भाषण देना उनकी विद्वता को एवं भारत के विविध सांस्कृतिक पक्षों पर उनका सम्मान दर्शाता हैं | वकालत की पढाई कर, इमर्जेन्सी में श्री जॉर्ज फर्नांडिस को सहयोग करते हुए, जनता पार्टी में उन्होंने अपनी जगह बनाई |

उनके बोलने का ढंग, सादगी और मुखर व्यक्तित्व अधिकतर आम भारतीयों को भा जाता था | राजनितिक विचारों से अलग हटकर उनकी छवि एक कर्मठ नेता की रही | ट्विटर पर आम लोगों की समस्याओं को सुलझाना उन्हें काफी सुगम बनाता था | मुश्किल घड़ी में यमन देश से नागरिको को सफलतापूर्वक बचाव कर और ऐसे कई कार्यो से वो आम लोगों की संवेदना को समझती थी | इन्हीं सब खूबियों के कारण ही अपने जीवन के युवा काल से ही वो राजनीति में स्वच्छ छवि के साथ सक्रीय रहीं | ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ द्वारा उन्हें भारत का सबसे पसंदीदा राजनेता कहा गया |

किडनी प्रत्यारोपण में किसी भले व्यक्ति ने उन्हें अंग दान दिया | इससे हमें मानवीयता का एहसास होता हैं | व्यक्ति चाहे कितना भी नि:स्वार्थ हो, सभी को किसी न किसी क्षण में सहयोग की आवश्यकता होती हैं | हम सभी भारतवासी विशेषकर महिलाएं उनके जीवन-चरित्र से प्रेरणा ले एवं राष्ट्र-हित में आवश्यक कदम निडरता से, मुखरता से उठाए |

(यह एक गैर राजनितिक लेख हैं)

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