कश्मीर: धर्म, राष्ट्र और इंसानियत

लेखक - हिमांशु रंजन

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कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं | जब हम ये कहते हैं तो कश्मीरी भी भारतीय हैं ये सच भी जोड़ते हैं | भारत एक प्राचीन देश हैं | जब पाकिस्तान, बांग्लादेश न थे तब से भारत था | जब इस्लाम और ईसाई धर्म न थे, तब बौद्ध, जैन एवं वैदिक हिन्दू धर्म था जिनका उदय भारत में हुआ | इतिहास में धर्म और शासकों ने ऊंचा स्थान पाया हैं | सम्राट अशोक ने दोनों कार्यों में हिस्सा लिया | कश्मीर में 1320 ईस्वी में रिंचन नाम के बौद्ध शासक ने इस्लाम धर्म एक सूफी संत से प्रभावित होकर अपना लिया | उसके बाद वहां लोगों ने धर्म परिवर्तन किया |

यह भी ध्यान देने वाली बात हैं की धर्म और शासन एक दुसरे से जुड़े रहे हैं | राजा जिस धर्म का हो अगर वहीं धर्म प्रसारित होने लगे तो धर्म-निरपेक्ष नहीं कह सकते | यह चिर काल से चला आ रहा है | संविधान में धर्म- निरपेक्ष लिख देने से ही चीज़ें नहीं बदलती | बौद्ध, सिख और जैन धर्मों को हिन्दू धर्म से शिकायत नहीं थी | इस्लाम में सूफी दर्शन भी भक्ति योग से मिलता जुलता रहा है | लोग प्रभावित हुए | धर्म परिवर्तन किया | पर सभी ने दर्शन से प्रभावित होकर नहीं किया | जबरन कराया भी गया | यह आज के हिसाब से असंवैधानिक हैं | यह हिन्दुओं-मुस्लिमों ने किया | अपना धर्म सभी को प्रिय लगता हैं | यानी की एक तनाव धर्म दर्शन की विविधताओं को जबरन शासकों द्वारा लागू करने के कारण पैदा हुआ |

अब मुस्लिम, मुग़ल शासकों के बाद सिख शासकों ने कश्मीर पर राज किया | जब भारत को आज़ादी मिली, हम धार्मिक दंगों में व्यस्त रहे | देश के धर्म के नाम पर तीन टुकड़े किए गए | वैसे अंग्रेज़ों ने तो 500 से ज्यादा ही टुकड़ों में बाँटने का बंदोबस्त किया था | सरदार पटेल ने भारत के रजवाड़ों को साथ किया | धर्म -दर्शन और राज वंश से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण किया | कहीं सैन्य बल का भी इस्तेमाल हुआ |

कश्मीर पर पाकिस्तान ने अपना औचित्य समझा | पर धर्म के नाम पर बंटवारा सभी की सोच नहीं थी | भारत ने एक धर्म-निरपेक्ष राष्ट्र की नींव रखी | इस नींव को हमें बनाए रखना हैं | कश्मीर का भारत में विलय कानूनी था | देश बांटने से पहले कोई जनमत संग्रह कहीं नहीं किया गया | फिर भी कश्मीर का 45 प्रतिशत भू-भाग ही भारत देश में हैं |

1990 के समय से पाकिस्तान ने छद्म आतंकवाद को बढ़ावा दिया हैं | कश्मीरी पंडितों के साथ भी अन्याय हुआ | घाटी में सभी लोगों के साथ भी | पाकिस्तान इस्लामिक देश हैं इसका अर्थ ये नहीं हैं की वो सही हैं | धर्म और राष्ट्र दो अलग अलग बिन्दु हैं | हिन्दुस्तान धर्म-निरपेक्ष हैं पर हिन्दुओं द्वारा शासित कहा जा सकता हैं | आदर्श छवि तो नहीं हैं पर पाकिस्तान से भारत काफी बेहतर हैं | कश्मीरियों का देश भारत देश हैं | भले उनका धर्म जो भी हो |

राष्ट्र एक पहचान हैं | यह कुछ कुछ धर्म जैसा ही हैं | एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र स्वमन से धर्म-परिवर्तन की इज़ाज़त देता हैं क्यूंकि उसके संविधान में राष्ट्र धर्म सर्वोपरि हैं | राष्ट्र के खिलाफ बोलना देश द्रोह जैसा हैं | आदर्श तो ये भी नहीं हैं पर आदर्श जैसा कुछ खोज पाना भी मुश्किल ही हैं |

पहचान एक सोच हैं | और सोच प्रभावित की जा सकती हैं | चूंकि मैं भारतीय हूँ – मैं तो यही चाहूंगा की कश्मीर के लोग भारतीयता से जुड़ जाएं | पाकिस्तान से दूरी बनाए | पत्थरबाज़ी न करें | सूफी धर्म, इस्लाम धर्म, बौद्ध धर्म, वैदिक धर्मों के दर्शन से खुद को जोड़े – पहचान और विरासत पर गर्व करें | जब कश्मीरी पहचान भारतीयता के वृत्ति में स्वयं को शामिल पाएगी और धर्म दर्शन को और राष्ट्र दर्शन को अलग रख पाएगी तो हालात स्वतः सामान्य होंगे | पहले घर के अंदर सामंजस्य बनाए तो जवान भी सरहद पर ही दिखाई देंगे | पढ़ें-लिखें और अच्छे संस्थानों में प्रवेश ले, खेले कूदे और ओलम्पिक में स्वर्ण का स्वप्न देखें, मंगल और चन्द्रमा पर जाने की बातें करें, चुनावों में लड़ें |

भारत सरकार के फैसले को स्वीकार करें या विरोध में सुप्रीम कोर्ट जाएं | हिंसा को न अपनाएं | कश्मीर में हालात सामान्य होना, बेहतर होना कश्मीरियों के ही हाथ में हैं | आपकी पहचान अपने आप में पूर्ण हैं और भारत से जुडी हैं | इस पर गर्व करें | हालांकि हालात जैसे हैं उस पर एक आई.ए.एस. अधिकारी ने इस्तीफ़ा भी दिया | भारत सरकार को ये समझना होगा और लोगों को लिखित एवं मौखिक विरोध करने का अधिकार घाटी में देना होगा | धीरे-धीरे ही होगा | लोगों से जुड़े नेताओं को अवसर दे | और सही सोच प्रणाली को अखबारों, रेडियो, टी.वी. पर प्रसारित करते रहें | ऐसा करें की राष्ट्र-धर्म और इंसानियत दोनों ही सजीव हो उठे |

मैं कश्मीर के लोगों के भी विचार जानना चाहूंगा | आदर्श लोकतंत्र तो यहीं हैं | थोड़ा सब्र रखें, आशा पूर्ण रहें, कुछ सकारात्मक विचार रखें, कुछ सकारात्मक योगदान दे | आओ साथ साथ चलें |

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