विश्व के नेताओं को यूक्रेन की स्तिथि पर एक खुला पत्र

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अमेरिका के राष्ट्रपति श्री जो बाइडेन, रूस के राष्ट्रपति श्री व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति श्री वोलोदीमीर ज़ेलेन्स्की, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव श्री अंटोनिओ गूटेर्रेस 

विषय: राष्ट्रीय हितों, अंतर्राष्ट्रीय हितों, एवं मानवीय हितों में सामंजस्य बैठाने के लिए आपस में बातचीत कर समाधान निकाले  

महोदय, 

        आप सभी ऐसे पदों पर विराजमान है – जहाँ आपके द्वारा लिए गए फैसले संपूर्ण विश्व को प्रभावित करते है | अतः आप वर्तमान परिस्तिथि को ध्यान में रख इन विचारों पर ध्यान दें –

सर्वप्रथम तो हमें कुछ तथ्यों पर ध्यान देना होगा – 

 1 ) रूस मुख्यतः नाटो के विस्तारीकरण से परेशान है – वह इसे अपनी सुरक्षा से जोड़कर देखता है, क्यूंकि यह अब उसके सीमावर्ती देशों तक घुस आया है |

2 ) शक्ति-संतुलन के हिसाब से भी नाटो का यूक्रेन तक विस्तारीकरण तर्क-संगत नहीं है | क्यूंकि सोवियत संघ का विघटन हो चुका है और वारसा संधि भी नहीं रही है | यहाँ तक की कई देश जो पूर्व में वारसा संधि के तहत सोवियत संघ के साथ थे, आज नाटो में जा मिले है |

3 ) यूक्रेन विगत में सोवियत संघ का हिस्सा था किन्तु उसका झुकाव यूरोपीय संघ एवं नाटो की ओर बढ़ा है |

4 ) यूक्रेन के पूर्ववर्ती क्षेत्रों में आतंरिक विद्रोह भी छिड़ा हुआ है |

5 ) रूस ने इसके लिए चेतावनी भी दी और अंततः यूक्रेन पर हमला कर दिया |

6 ) किन्तु यूक्रेन ने जब बुडापेस्ट मेमोरेंडम के तहत अपने परमाणु हथियार त्याग दिए – तो रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, और यूनाइटेड किंगडम ने उसे सुरक्षा गारंटी भी दी |

7 ) कई देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाया है, उसे वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर दिया गया है | 

 8 ) वर्तमान समस्या से मुख्यत: यूक्रेन और रूस को सबसे अधिक हानि हो रही है – क्यूंकि युद्ध में न केवल मासूम नागरिकों की जान जाती है, इससे देश भी आर्थिक दृष्टि से कई वर्ष पीछे चले जाते है | 

कई बार ऐसा होता है की हम अपने हितों की रक्षा करने के कारण, आपसी विश्वास की कमी के कारण, पूरी दुनिया का, मानवजाति का अहित कर बैठते है | इसे खेल सिंद्धांत में प्रचलित रूप से ‘बंदी की दुविधा’ का नाम दिया जाता है | आप सभी इससे वाकिफ़ होंगे | पूरी दुनिया ने कोरोना महामारी के कारण कई कष्ट सहे, और अब आप युद्ध देख रहे है जिसका समाधान बातचीत से हो सकता है | आप चाहें तो कई मासूम लोगों के प्राण बच सकते है, आपके राष्ट्र के साथ-साथ, पूरी दुनिया का हित हो सकता है | ज़रुरत है थोड़े विश्वास के साथ बातचीत की, कुछ समझौतों की | 

कई समाधान हो सकते हैं – मुझे जो तर्कसंगत लग रहा है वह मैं आप सभी के समक्ष रख रहा हूँ – 

1 ) सबसे पहले तो मैं यूक्रेन के राष्ट्रपति श्री वोलोदीमीर ज़ेलेन्स्की से कहना चाहूंगा की आप अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में रूस जैसे पड़ोसी देशों को जो महत्व देते आए है – उसे कई गुणा बढ़ाएं | संयुक्त राज्य अमेरिका से अधिक महत्त्वपूर्ण आपके देश के लिए रूस है | आप कहेंगे की रूस ने क्रीमिया पर तो पहले ही अधिकार जमा लिया, पूर्वी क्षेत्रों में आतंरिक विद्रोह भी छिड़ा हुआ है, और अब तो रूस ने हमला ही कर दिया | मैं मानता हूँ, किन्तु रूस और यूक्रेन कभी सोवियत संघ के हिस्सा थे, पूर्वी यूक्रेन में बहुतायत लोग रूसी भाषा बोलते है, आपका एक साझा इतिहास रहा है | दूसरी की आप ने खुद ही देखा की जब रूस ने हमला किया तो, संयुक्त राज्य अमेरिका सैन्य मदद को न आया | हाँ, नाटो के द्वार यूक्रेन के लिए खुला छोड़कर उसने रूस को जरूर उकसाया | रूस सोवियत संघ के विघटन के बाद भी एक महाशक्ति है | उसके पास परमाणु हथियारों का जखीरा है | यूक्रेन और रूस में कोई मुक़ाबला नहीं है | आपको अपने देश का हित देखना है, न की संयुक्त राज्य अमेरिका का | आपने आम मासूम नागरिकों को युद्ध में धकेल दिया है | आप के देश की जनता बहादुर है | वह अपना कर्त्तव्य अदा कर रही है, किन्तु आपको एक चुने हुए जन प्रतिनिधि के रूप में अपनी जनता का कल्याण सोचना है | आपको अपना कर्त्तव्य अदा करना है | आपको आदर्शवाद से यथार्थवाद की ओर कदम बढ़ाना होगा | आपको यह ध्यान रखना होगा की आप अपना पडोसी देश नहीं चुन सकते | और सच्चा मित्र तो वही है जो संकट की घड़ी में काम आए | भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के पक्ष में क्यूँ मत नहीं दिया – क्यूंकि रूस भारत का वह मित्र है – जो संकट की घड़ी में भारत के साथ था | कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में कहा है – 

      “ प्रजा के सुख में राजा का सुख है, उनके कल्याण में उसका कल्याण है।”

     अतः आपकी प्रजा का कल्याण इस परिस्तिथि में रूस के साथ बातचीत ही है | जब आप रूस के साथ बातचीत करने जाए – तो सर्वप्रथम तो संघर्ष विराम की बात करें, आत्म समर्पण की नहीं | क्यूंकि वार्ता संघर्ष विराम के बाद ही होती है | दूसरी आप रूस को बुडापेस्ट मेमोरेंडम की याद दिलाए – जब आपके देश ने वैश्विक हित में परमाणु हथियार त्याग दिए और रूस ने सुरक्षा गारंटी दी | इस एक बिंदु पर यह हो सकता है की रूस संघर्ष विराम की बात स्वीकार ले | क्यूंकि यह कई देशों की संस्कृति एवं एक मानवीय मूल्य है की किए गए समझौतों पर, दिए गए भरोसे पर मुकरना नहीं चाहिए | संघर्ष विराम के पश्चात आप रूस से कहें की आपका देश आर्थिक खुशहाली, लोकतंत्र चाहता है, युद्ध नहीं | अतः यूक्रेन नाटो को सर्वथा त्याग देगा, संयुक्त राज्य अमेरिका से दूरी बनाएगा, एवं रूस और यूक्रेन एक दुसरे की सुरक्षा हितों पर ध्यान देंगे, क्यूंकि वह आपस में पडोसी देश है | इसके बदले में रूस यूक्रेन के सभी भू-भागों पर अपना कब्ज़ा त्याग देगा | इस समझौते के अनुसार मुख्यतः यूक्रेन रूस की सुरक्षा हितों को देखेगा, एवं अपनी प्रजा की कल्याण के लिए लोकतंत्र एवं आर्थिक खुशहाली पर अधिक ध्यान देगा | संयुक्त राज्य अमेरिका एवं नाटो से दूरी बनाएगा |

  2 ) अब मैं रूस के राष्ट्रपति श्री व्लादिमीर पुतिन से यह मांग रखता हूँ | अगर आप यूक्रेन पर कब्ज़ा कर चुनाव कराते है तो वह स्वतन्त्र चुनाव नहीं होगा | इससे आप वहां एक कठपुतली सरकार तो स्थापित कर देंगे, किन्तु इससे गृह-युद्ध छिड़ जाएगा, स्थिरता नहीं आएगी | साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चीन के अलावा आप अलग-थलग पड़ जाएंगे | आपका देश आर्थिक रूप से और कमज़ोर हो जाएगा, साथ ही चीन पर आपकी निर्भरता बढ़ जाएगी | आपका यूरोपीय देशों से भी मधुर सम्बन्ध टूट जाएगा | साथ ही कई मासूम रुसी एवं यूक्रेनी नागरिक मारे जाएंगे | अतः यूक्रेन के बुडापेस्ट मेमोरेंडम का हवाला देने पर आप संघर्ष विराम की घोषणा करें | क्यूंकि जिसने सुरक्षा गारंटी दी अगर वही हमलावर हो जाए तो यह नीतिहीनता है | जब आप बातचीत करें तो यूक्रेन को नाटो के विस्तारीकरण से होने वाली शक्ति-असंतुलन एवं रूस के सुरक्षा हितों का हवाला दें | साथ ही यूक्रेन को समझाएं की उसका पडोसी देश रूस है न की संयुक्त राज्य अमेरिका |अतः यूक्रेन अगर नाटो के लिए दरवाज़े हमेशा के लिए बंद कर दें, साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका से दूरी बनाए, तो रूस यूक्रेन के भू-भागों को त्याग देगा जिसमें क्रीमिया भी शामिल है | यानी की यूक्रेन और रूस मित्र राष्ट्र बन जाएंगे, अतः एक दुसरे के हितों का ध्यान रखेंगे | यह एक समझौता होगा | रूस की कार्रवाई से यूक्रेन की जनता की भावना रूस के विरुद्ध ही हो गई है | अतः मित्रता तो समय के साथ ही आएगी | किन्तु समझौते से रूस अपने आर्थिक एवं सुरक्षा हितों को साध भी सकता है, साथ ही कब्ज़ा किए भू-भागों को त्यागकर जी-8 की सदस्यता  पुनः ग्रहण कर सकता है | साथ ही यूरोपीय देशों से सम्बन्ध सुधारकर, चीन पर निर्भरता कम कर सकता है | रूस को ज़रुरत है आर्थिक शक्ति बनने की, भू-भाग तो उसके पास पहले से ही सबसे अधिक है |

   3 ) अब मै संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति श्री जो बाइडेन से यह मांग रखता हूँ – सर्वप्रथम तो नाटो के विस्तारीकरण पर अंकुश लगाएं | इस का खामियाजा यूक्रेन एवं रूस की मासूम जनता भुगत रही है | दूसरी की रूस के संघर्ष विराम और आपसी समझौते के बाद यूक्रेन में दखलंदाज़ी बंद करें | साथ ही रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबन्ध हटाएँ | नाटो का रक्षा बजट एवं विस्तारीकरण किसी भी देश को उसकी सुरक्षा के लिए संशय उत्पन्न कर सकता है | नाटो एवं रूस के बीच कुछ अंतःस्थ देश विश्व सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है | 

     4 ) संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ‘श्री अंटोनिओ गूटेर्रेस’ तत्काल रूप से यूक्रेन के लिए मानवीय सहायता भेजें एवं सभी देशों से संघर्ष विराम, बात-चीत, समझौतों द्वारा समाधान  की निवेदन करें | युद्ध से प्रभावित एवं विस्थापित लोगों को राहत पहुंचाएं | इस विश्व को बेहतर बनाए | इतिहास से हम कुछ सीखें | आप सभी का नेतृत्व ही विश्व को और बेहतर बनाएगा।

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